होली कविता : इस होली कहीं रंग न कम पड़ जाए | आपकी कलम से | Rahul Gaurav

है ना होली आज मना रहे हो न, कौन कितना खास है जता रहे हो न, अच्छे से जताना कही

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युवा दिवस विशेष: युवा अपना समर्पण चिन्हित करता है|रावण रूद्र

युवा संवाद सुनिश्चित करता है, समय संचित करता है, बनकर स्वामी स्वयं का, कार्य निश्चित करता है, वर्ग से इसे

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फादर्स डे स्पेशल : बाबा का सहारा | शैलेन्द्र ‘उज्जैनी’

न दौलत चाहिए ,न शोहरत चाहिए…. जिनको पकड़कर चलना सीखा था….. फिर उन उँगलियों का सहारा चाहिए… अकेला हो गया

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ग़ज़ल : इस आशिकी को मौत से भी ठान लेने दो | राजीव रंजन झा

  ये दुनिया जानती है तो उसे पहचान लेने दो उसे हक है वो जो माने उसे बस मान लेने

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पर्यावरण की अनदेखी से खत्म हो सकता है मानव का अस्तित्व | रोहित राज वर्मा

पर्यावरण शब्द का निर्माण दो शब्दों परि और आवरण से मिलकर हुआ है, जिसमें परि का मतलब है हमारे आसपास

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कहानी: दो रूपये कम हैं | शैलेन्द्र “उज्जैनी”

आज बाहरवी का नतीजा आने वाला है. सब जगह मंदिरों में छात्र-छात्राओं की भीड़ उमड़ी पड़ी है. हो भी क्यों

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कहानी : नेक दिल चोर | शैलेंद्र “उज्जैनी”

चारों तरफ हाहाकार मचा हुआ था. एक अनजान सी बीमारी ने पूरे शहर को आगोश मे ले लिया था. सारे

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कविता : वो गुज़रा ज़माना याद आता है

अब भी वो गुज़रा ज़माना याद आता है, शाम जब भी बैठता हूँ तो दोस्त पुराना याद आता है। …..

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जो बुरे वक्त में काम आये वही मेरा पैगम्बर है | कविता

जितना मेरी आँखो में है बस उतना मंज़र मेरा है, मेरे लोटे में आ जाए बस उतना समंदर मेरा है।

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यूं ही नहीं मेरे शब्दों का जमाना दीवाना है

कोरोना तो महज एक बहाना है, असल मकसद तो कर्मफल चुकाना है। सालों से पिंजरे में कैद थी चिड़िया, अब

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