यूं ही नहीं मेरे शब्दों का जमाना दीवाना है

कोरोना तो महज एक बहाना है, असल मकसद तो कर्मफल चुकाना है। सालों से पिंजरे में कैद थी चिड़िया, अब

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मैं…

मैं …मैं राहगीर हूँ, तो राह भी मैं ही हूँ. मैं श्रमिक हूँ, तो श्रम भी मैं ही हूँ. मैं

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सिर्फ इशारे क्यों दिल भी दो ना

प्रशान्त आर्यवंशी kprashant1920@gmail.com   अब गरीबों से बात कौन करता है ! वो शाह लोग हैं.. मुलाकात कौन करता है

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अगर इंसान की पूँछ होती

अगर इंसान की पूँछ होती, तो क्या अजब ये दुनिया होती, पूंछों मूंछों के चक्कर में,सारी दुनिया उलझी होती। अगर

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