सिर्फ इशारे क्यों दिल भी दो ना

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अब गरीबों से बात कौन करता है !
वो शाह लोग हैं.. मुलाकात कौन करता है !!

नजर की बात है तो फिर नजर ही रहने दो !
लबों को खोलने पे दुश्मनी बढ जाएगी !!

दिल के लहरों को हम अरसे से बाँध रक्खे हैं !
समंदर खुल गया तो अब तृष्णगी बढ जाएगी !!

तुम्हें जब बात करना आता है, तो मिल ही लो ना !
तब से बस तुम इशारे दे रहे अब दिल भी दो ना !!

मोहब्बत में तमाशा खूब करना ठीक है क्या,
जो रूठा हो नहीं उसको मनाना ठीक है क्या!

उसकी आँख में इक बूंद भी न छलके आँसू!
मेरी आँख में अब सूख गए हैं आँसू !!

इतना भी क्या कि उसी से बस शौक है मोहब्बत का !
हमको कहता है खुद-परस्त हो तुम…ये आँसू !!

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*खुद-परस्त- अभिमानी, अहंकारी

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