अगर इंसान की पूँछ होती

Spread the love

शैलेन्द्र “उज्जैनी” vshailendrakumar@ymail.com

अगर इंसान की पूँछ होती, तो क्या अजब ये दुनिया होती,
पूंछों मूंछों के चक्कर में,सारी दुनिया उलझी होती।
अगर इंसान की पूँछ होती, तो क्या अजब ये दुनिया होती।

जो अगर इंसान की पूँछ होती,
तो जिन्दगी कुछ यूं होती,
हसीनाओं की खूबसूरती ज़ुल्फों से नहीं,
पूँछों से बयाँ होती।
विज्ञापन की दुनिया में भी,
पूँछों की अमिट दास्तान होती ।
अगर इंसान की पूँछ होती,
तो क्या अजब ये दुनिया होती।

फेरे लेने के लिए ज़रूरत न होती फिर गठबंधन की,
सारी की सारी रस्में मोहताज़ होती बस पूँछों के बंधन की।
इतिहास में भी मूंछों की नहीं,
पूँछ की स्वर्ण लिखित दास्तान होती।
अगर इंसान की पूँछ होती,
तो क्या अजब ये दुनिया होती।

ऐसे में फिर  नेताओं की हालत क्या होती?
बिन पूँछों के ही जानवर हैं,
फिर नेताओं कि बगावत क्या होती?
विपक्ष की नज़र सदा पक्ष दल की पूँछों पर होती,
अगर इंसान की पूँछ होती,
तो क्या अजब ये दुनिया होती।

कवियों की कविताएं, शायरों की शायरी,
जुल्फों पर फिर कहाँ होती,
किसकी पूँछ सबसे सुन्दर है,
कुछ ऐसी ही प्रतियोगिता होती।
सैलूनों मे भी पूँछो के सौंदर्य के लिए पूरी व्यवस्था होती।
अगर इंसान की पूँछ होती,
तो क्या अजब ये दुनिया होती।

                   ******

शादी से पहले करें यह काम, नहीं होगा तलाक, देखें यह वीडियो


हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें।

Spread the love
READ  क्या शिवपुरी सब्जी मंडी को निगल जायेगी दीघा-आर ब्लॉक फोरलेन सड़क
Do NOT follow this link or you will be banned from the site! © Word To Word 2019 | Powered by Janta Web Solutions ®
%d bloggers like this: