क्या है वट सावित्री पूजा करने का सही तरीका, जानिए यहां

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सुहागन स्त्रियों द्वारा वट सावित्री पूजा अपने पतियों की लंबी आयु के लिए की जाती है. लेकिन इसके लिए वट सावित्री पूजा करने का सही तरीका क्या है यह जानना जरूरी है.

कब मनाई जाती है वट सावित्री पूजा

ज्येष्ठ महीने की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को वट सावित्री व्रत रखा जाता है. इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु व सुख-समृद्धि की कामना करते हुए वट सावित्री की पूजा-अराधना करती हैं. ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष त्रयोदशी से अमावस्या तक यह व्रत किया जाता है. कुछ महिलाएं बड़ साते यानी सप्तमी को भी व्रत रखती हैं.

वट सावित्री पूजा करने का सही तरीका

महिलाएं इस दिन व्रत रखकर वट वृक्ष के पास धूप-दीप, नैवेद्य से पूजा करती हैं. पूजा के समय वट वृक्ष पर रोली और अक्षत चढ़ाकर कलावा बांधती हैं. महिलाएं हाथ जोड़कर वट वृक्ष की परिक्रमा करती हैं.
इस दिन महिलाएं पूजन सामग्री के तौर पर सिंदूर, दर्पण, मौली, काजल, मेहंदी, चूड़ी, माथे की बिंदी, साड़ी और सात तरह का अनाज और सत्यवान सावित्री की प्रतिमा को शामिल करती हैं. कहा जाता है कि वट वृक्ष के नीचे देवी सावित्री ने अपने पति व्रत के प्रभाव से मृत पड़े सत्यवान को पुन: जीवित कर दिया था. तभी से इस व्रत को वट सावित्री के नाम से जाना जाता है. ये सभी चीजें वट वृक्ष के नीचे रखी जाती हैं. इसके बाद पेड़ की जड़ में जल अर्पित किया जाता है. कई जगह महिलाएं सुहाग का सामान और खाने की सामग्री रखकर साड़ी के साथ सास को बायना भी देती हैं.

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