थ्री इडियट्स वाले फुंशुक बांगडू का नया कमाल, सेना के लिए किया ये गजब का अविष्कार

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मशहूर फिल्म ‘थ्री ईडियट्स’ में आमिर खान ने फुंशुक बांगडू का किरदार निभाया था. फुंशुक बांगडू का किरदार असल में लद्दाख के सोनम वांगचुक से प्रेरित है, जिन्होंने लद्दाख में स्कूल खोल रखा है. इन्हीं सोनम वांगचुक ने लद्दाख की खून जमा देनेवाली सर्दी में तैनात जवानों के लिए एक ऐसा टेंट तैयार किया है, जो बिना लकड़ी, किरोसीन के केवल सूरज की गर्मी से ही काफी गर्म रहता है. दस जवानों के रहने लायक इस टेंट के अंदर का तापमान 20 डिग्री तब रहता है, जब बाहर का तापमान माइनस 20 डिग्री हो.

सोनम वांगचुक ने शुक्रवार को ट्वीट कर बताया कि गलवान वैली में रात के 10 बजे जहां बाहर का तापमान -14°C था, टेंट के भीतर का तापमान +15°C था. इसमें न तो किरोसिन की जरूरत है और न ही इससे प्रदूषण होगा. 30 किलो वजनी यह टेंट पूरी तरह से पोर्टेबल है और इसमें दस जवान रह सकते हैं. इस टेंट के अंदर भारतीय सेना के जवानों को लद्दाख की सर्द रातें गुजारने में काफी आसानी होगी. इस सोलर हीटेड मिलिट्री टेंट की खासियत यह है कि यह सौर ऊर्जा की मदद से काम करता है.

सोनम ने दरअसल मड हट्स यानी कीचड़ की मदद से ऐसे घरों का निर्माण किया है जो पूरी तरह से सोलर एनर्जी पर चलते हैं और जिन्‍हें बाहर से गर्म करने के लिए बहुत कम हीटिंग की जरूरत पड़ती है. उनके इस नए आविष्‍कार में सेना ने भी रूचि लेनी शुरू की. उनके आविष्‍कार को उन तमाम सैनिकों के लिए सही समाधान माना गया था जो लद्दाख में तैनात रहते हैं.

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सोनम वांगचुक पर ही बनी थी थ्री ईडियट्स

सोनम वांगचुक वही शख्स हैं, जिन पर सुपरहिट फिल्म थ्री इडियट्स बनी थी. इस फिल्म में आमिर खान ने सोनम वांगचुक की भूमिका निभाई थी. इसमें आमिर का नाम रैंचो रहता है. सोनम वांगचुक ने बताया कि लद्दाख में 24 घंटे बिजली रहना मुश्किल है. इसकी वजह से यहां पर तैनात ऑफिसर्स और जवानों को डीजल, मिट्टी का तेल या फिर लकड़ी जलाने पर ही निर्भर रहना पड़ता है. इससे प्रदूषण तो होता ही है साथ ही ये कम प्रभावी भी होता हैं. लेकिन सोनम का यह टेंट हीटर सोलर एनर्जी से गर्म होगा. इसमें सोलर एनर्जी को स्टोर करने की क्षमता भी है.

आईस स्‍तूप के लिए हुए मशहूर
सोनम वांगचुक को उनके आईस स्‍तूप के लिए जाना जाता है. उनके इस आविष्‍कार को लद्दाख का सबसे कारगर आविष्‍कार माना जाता है. यह आविष्‍कार स्‍टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्‍चरल मूवमेंट्स ऑफ लद्दाख का केंद्र बिंदु है. इस संस्‍थान को क्षेत्र में शैक्षिक व्‍यवस्‍था में परिवर्तन लाने के लिए जिम्‍मेदार माना जाता है. इसके बाद वांगचुक ने हिमालयन इंस्‍टीट्यूट ऑफ अल्‍टरनेटिव्‍स की शुरुआत की. यह इंस्‍टीट्यूट उच्‍च शिक्षा से जुड़ा है.

जीरो एनर्जी का खर्च
इन टेंट के लिए जरूरी है कि सभी भवन दक्षिण दिशा की तरफ केंद्रित होनी चाहिए ताकि उन्‍हें सूरज की रोशनी भरपूर मिले. इसकी वजह से बिल्डिंग्‍स में पैसिव हीटिंग को बल मिलता है. बता दें कि इस सोलर टेंट को बनाने में वांगचुक को चार सप्ताह का वक्त लगा है.

 

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