चांद पर भी इस्तेमाल कर पाएंगे मोबाइल नेटवर्क, नासा के साथ अपना नेटवर्क स्थापित करेगी नोकिया

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चंद्रमा पर पहला सेल्युलर नेटवर्क बनाने के लिए नासा ने नोकिया कंपनी को चुना है. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी भविष्य के लिए योजना बना रही कि इंसान चांद पर दोबारा लौटेंगे और बस्तियां बसाएंगे. नासा का टारगेट 2024 तक इंसानों को चंद्रमा पर ले जाने का है और अपने आर्टेमिस (Artemis) प्रोग्राम के तहत लंबे समय तक वहां मौजूदगी दर्ज कराने का है. नोकिया ने कहा कि अंतरिक्ष में पहला वायरलेस ब्रॉडबैंड कम्युनिकेशन सिस्टम 2022 के अंत में चंद्रमा की सतह पर बनाया जाएगा. कंपनी इसके लिए टेक्सास बेस्ड प्राइवेट स्पेस क्राफ्ट डिजाइन कंपनी इन्टुएटीव मशीनों के साथ साझेदारी करेगी, जो नोकिया के इक्विपमेंट्स चांद पर पहुंचाएगी.

इस नेटवर्क से अंतरिक्ष यात्रियों को आवाज और वीडियो कम्युनिकेशन करने की सुविधाएं मिलेंगी साथ ही वे टेलीमेट्री और बायोमेट्रिक डेटा एक्सचेंज और रोवर्स और अन्य रोबोटिक डिवाइसेस को तैनात और रिमोटली कंट्रोल भी कर पाएंगे.

मुश्किल हालात में भी काम करेगा नेटवर्क

नेटवर्क को इस तरह से डिजाइन किया जाएगा कि वह चांद पर लॉन्चिंग और लैंडिंग की विषम परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम होगा. इसे बेहद कठोर आकार, वजन और बिजली की कमी को पूरा करने के लिए बेहद कॉम्पैक्ट रूप में चंद्रमा पर भेजा जाएगा.

नोकिया 5G नेटवर्क की बजाए 4G/LTE का उपयोग करेगा जो पिछले कई दशकों से दुनियाभर में उपयोग किया जा रहा है और अपनी विश्वसनीयता साबित कर चुका है. हालांकि कंपनी 5G के स्पेस एप्लीकेशंस को भी आगे बढ़ाएगी.

क्या है नासा का आर्टेमिस प्रोग्राम

आर्टेमिस प्रोग्राम के साथ नासा 2024 तक चंद्रमा पर पहली महिला और अगले आदमी को उतारेगा, जो पहले से कहीं अधिक चंद्रमा की सतह का पता लगाने के लिए नई तकनीकों का उपयोग करेगा. इसके लिए उसने अपने कमर्शियल और अंतर्राष्ट्रीय पार्टनर्स के साथ साझेदारी भी की है. इस प्रोग्राम के तहत, इंसान चंद्रमा के उन क्षेत्रों का पता लगाएंगे जो अब तक हमारी नजरों से अनछुए हैं.

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नासा अब रोबोटिकली चांद पर लौटेगा जिसकी शुरुआत अगले साल से हो जाएगी. चार साल के भीतर वहां अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने और इस दशक के अंत तक लंबे समय तक वहां अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की पूरी तैयारी हो चुकी है.

नोकिया पहले भी कर चुकी है कोशिश
यह पहली बार नहीं जब नोकिया चंद्रमा पर LTE नेटवर्क लॉन्च करने का प्रयास कर रही है. नोकिया ने 2018 में भी जर्मन स्पेस कंपनी PTScientists और वोडाफोन यूके के साथ मिलकर अपोलो 17 लैंडिंग की साइट पर एक LTE नेटवर्क लॉन्च करने की योजना बनाई थी, लेकिन मिशन कभी पूरी नहीं हो पाया. नासा ने चंद्रमा पर 4G सेल्युलर नेटवर्क स्थापित करने के लिए 14.1 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 103 करोड़ रुपए) नोकिया को दिए हैं.

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