क्या अब धरती से दिखेंगे दो चाँद, जानिए क्या है पूरा माजरा

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पृथ्वी की कक्षा में एक नया छोटा चांद शामिल होने वाला है. जो फिलहाल पृथ्वी से 27,000 मील दूर है.असल में यह एक एस्टेरॉयड है. जो धरती की तरफ आ रहा है. हालांकि वैज्ञानिकों का मानना है कि यह अंतरिक्ष का पुराना कबाड़ हो सकता है. जो वापस हमारे ग्रह पर आ रहे हैं. इसे 2020 एसओ नाम दिया गया है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह 1960 के दशक का एक पुराना बूस्टर रॉकेट हो सकता है. हालांकि वैज्ञानिक अभी इसपर पक्के तौर पर कुछ नहीं कह पा रहे हैं. क्योंकि फिलहाल यह सूर्य के एक कक्षा का अनुसरण कर रहा है.

यह उस तरह की कक्षा है, जब रॉकेट चंद्रयान अभियान के लिए अलग होता है. एक बार यह चंद्रमा की कक्षा से गुजरता है और फिर सूर्य की ऑर्बिट के तरफ चला जाता है. हालांकि यह संभावना नहीं के बराबर है कि इस तरह की कक्षा में कोई क्षुद्रग्रह विकसित हो सकता है, पर यह असंभव भी नहीं है.

नवंबर में प्रवेश करेगा धरती की कक्षा में

इस छुद्रग्रह की स्पीड का विश्लेषण करने और उसे पुराने चंद्रयान मिशन के लॉन्च के साथ जोड़ने पर पाया गया कि यह 1966 के अंत में पृथ्वी के आसपास के क्षेत्र में था. इस हिसाब से 20 सितंबर 1966 को सर्वेयर 2 के प्रक्षेपण के साथ इस रॉकेट बूस्टर का संबंध हो सकता है. क्योंकि उस मिशन को चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन मिशन असफल रहा और अंतरिक्ष यान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इस अंतरिक्ष यान में रॉकेट बूस्टर के तौर पर सेंटूर रॉकेट का इस्तेमाल किया गया था. जो दुर्घटना के बाद सूर्य के पास वाले ऑर्बिट में चला गया था. जिसे उसके बाद आज तक नहीं देखा गया था. नवंबर के अंत में यह ऑब्जेक्ट पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश कर सकता है. अगर यह क्षुद्र ग्रह होगा तो इसे मिनी मून माना जायेगा.

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