क्या उल्कापिंड गिरने से हो सकती है मौत, ऐसी पहली मौत के सबूत मिले

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तुर्की के रिसर्चर्स ने उल्का गिरने से हुई मौत के पक्के साक्ष्य खोजने का दावा किया है. तुर्की गणराज्य के राष्ट्रपति पद के राज्य अभिलेखागार के सामान्य निदेशालय के अनुसार 22 अगस्त 1888 को एक उल्कापिंड गिरने से एक आदमी की मौत हुई वही दूसरे को लकवा मार गया था. यह घटना इराक के सुलेमानिया में हुई थी.

ये ऐसे किसी मामले का पहला रिकॉर्ड है. लेकिन रिसर्च टीम का मानना है कि ऐसे और भी रिकॉर्ड कहीं लोगों की नजरों से छुपे हो सकते हैं. हमारी धरती की तरफ हर रोज लाखों स्पेस रॉक खिंचे चले आते हैं मगर धरती के वायुमंडल में प्रवेश करते ही ये जलकर नष्ट हो जाते हैं. ऐसे पिंड नाम मात्र के होते हैं जो धरती से टकरा पाते हैं.

कैसे हुआ खुलासा

जिन दस्तावेजों में इस घटना की पुष्टि की गई है वो दरअसल लोकल अथॉरिटी द्वारा गवर्नमेंट को लिखा गया पत्र था जिसमें इस घटना की सूचना दी गयी थी. पत्र के मुताबिक जूलियन कैलेंडर के मुताबिक 10 अगस्त को और ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक 22 अगस्त को शाम के 8.30 बजे आकाश में फायरबॉल देखा गया. इसके बाद उल्कापिंड की बारिश शुरू हो गयी. जो करीब 10 मिनट तक लगातार होती रही. इसमें एक एक आदमी के मरने और एक दूसरे आदमी को लकवा मारने की खबर थी. इसके अलावा खेतों में खड़ी फसल को भी नुकसान पहुंचा था.

ऐसे में यह संभव है कि कभी ना कभी यह किसी इंसान को भी अपना शिकार बनाते ही होंगे. मगर आश्चर्यजनक रूप से इतिहास में अब तक ऐसा कोई रिकॉर्ड दर्ज नहीं था जिसमें कोई आकाशीय पिंड गिरने से किसी इंसान की मौत का जिक्र हो. 2013 में चेल्याबिन्स्क नाम का 654 किलो का भारी भरकम उल्का पिंड धरती के वायुमंडल में प्रवेश कर टुकड़े टुकड़े होकर धरती पर गिरा था. लेकिन इससे भी किसी की मौत नहीं हुई थी.

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नासा के फायरबॉल डाटाबेस की मानें तो 1988 से लेकर अब तक काम से कम 822 ऐसे उल्का पिंड धरती के वायुमंडल में प्रवेश कर चुके हैं जिनमें विस्फ़ोटक क्षमता थी. यही नहीं वैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि कम से कम 17 उल्का हर रोज धरती की सतह से टकरा सकती है.

अगर भारत की बात करें तो 2016 में वेल्लूर में एक आदमी की ऐसे ही एक उल्का पिंड के गिरने से हुए विस्फोट से जान जाने की रिपोर्ट सामने आई थी. लेकिन नासा ने इसका खंडन करते हुए कहा था कि वह विस्फोट किसी आकाशीय पिंड के कारण नहीं हुआ था.

उल्कापिंड का शिकार होने वाली एक मात्र महिला एन हॉज है. 1954 में जब वो अपने सोफे पर सो रही थी तब उनके छत से टकराते हुए एक पत्थर आकर उनकी कमर पर गिरा. उन्हें इससे कोई खास चोट नही लगी. बाद में जांच में इस पत्थर के आकाशीय पिंड होने की पुष्टि हुई.

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