निमोनिया का इलाज अब संभव होगा सिर्फ तीन दिन में

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निमोनिया के मरीजों को अब लंबे समय तक दवा के सहारे नहीं रहना पड़ेगा. बस तीन दिन में ही उन्हें बीमारी से छुटकारा मिल जाएगा. अभी तक छह दिन की खुराक दी जाती रही है. कुछ गंभीर मरीजों पर यह दवाएं भी असर नहीं करती थीं, ऐसे में हैलट के डॉक्टर नई दवा का ट्रायल करने जा रहे हैं जो निमोनिया पीड़ितों के लिए वरदान साबित होगी.

किन्हें होता है खतरा

निमोनिया से सर्वाधिक खतरा सांस रोगियों को होता है जिससे ऑक्सीजन का मार्ग सिकुड़ जाता है. हृदय और फेफड़ों के रोगी, शराब पीने वाले, किडनी फेलियर, एचआईवी, डायबिटीज पीड़ित लोगों को इससे ज्यादा खतरा होता है. नई दवा ऐसे रोगियों के लिए फायदेमंद होगी. हालांकि यह दवा सिर्फ वयस्कों के लिए ही होगी.

बीमारी के लक्षण-
– तेज बुखार के साथ बलगम वाली खांसी, सीने में हल्का दर्द होता है
– खांसी के साथ हरे या भूरे रंग का गाढ़ा बलगम आना, कभी-कभी हल्का खून
– अत्यधिक पसीना और ठंड लगना, सांस लेने में कठिनाई, मतली व उल्टी
– वायरस, बैक्टीरिया व फंगस संग संक्रमित लोगों के संपर्क में आने से
– शरीर का तापमान 101 डिग्री या इससे अधिक ऊपर होना
– दांत किटकिटाना के साथ दिल की धड़कन बढ़ना व भूख न लगना

कुछ तथ्य-
12 प्रतिशत कुल मौतों में निमोनिया से होने वाली मौतें हैं वयस्कों में
22 प्रतिशत निमोनिया रोगी डायबिटीज,सांस की बीमारियों, एलर्जी से पीड़ित वाले होते हैं
12 प्रतिशत अस्पतालों में भर्ती मरीजों को निमोनिया की संभावना
40 प्रतिशत आईसीयू के मरीजों को निमोनिया की संभावना
27 प्रतिशत बच्चे जिनकी आयु पांच वर्ष से की निमोनिया से होती है मौत
– 10 लाख मासूमों की दुनियाभर में निमोनिया से हर साल जाती है जान
– 3.5 लाख बच्चों की मौत हर साल भारत में न्यूमोकोकल निमोनिया से होती
– 17 लाख बच्चों के मरने की आशंका है निमोनिया से भारत में 2030 तक
– 22 प्रतिशत निमोनिया रोगी डायबिटीज, सांस की बीमारियों, एलर्जी से पीड़ित
– 12 प्रतिशत अस्पतालों में भर्ती मरीजों को निमोनिया की रहती है संभावना
– 40 प्रतिशत आईसीयू के मरीजों में होती है संभावना डॉक्टरों के मुताबिक

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शोध
– छह दिन की खुराक की नहीं पड़ेगी जरूरत, रिसर्च को इथिकल कमेटी की हरी झंडी
– कानपुर में मेडिसिन और चेस्ट रोग विशेषज्ञ करेंगे प्रयोग, गंभीर रोगियों को भी राहत

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