दरवाजे के हैंडल और कीबोर्ड जैसी जगहों पर 9 दिनों तक जिंदा रहता है कोरोना वायरस

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एक रिसर्च में खुलासा हुआ है कि वुहान से दुनियाभर में फैला कोरोना वायरस दरवाजों और गाड़ियों के हैंडल में टिक कर भी जिंदा रह सकता है. इसे खत्म करने के लिए डिसइंफेक्टेंट का इस्तेमाल जरूरी है, वरना यह आम फ्लू के मुकाबले चार गुना ज्यादा समय तक किसी सतह पर जिंदा रह सकता है. जहां साधारण फ्लू 2 दिन ही जिंदा रहता है, वहीं कोरोनावायरस सही स्थितियों में 9 दिन तक किसी सतह से दूसरे व्यक्ति को अपना शिकार बना सकता है.

रिसर्च में सामने आया कि कोरोनावायरस ग्लास, प्लास्टिक, लकड़ी और धातु से बनी वस्तुओं पर काफी समय तक जिंदा रह सकता है. फ्लू की तरह ही यह किसी भी वस्तु पर 4 डिग्री या उससे कम तापमान में एक महीने तक जिंदा रह सकता है. हालांकि, 30 डिग्री से ज्यादा तापमान में इसका सर्वाइवल रेट (जीवित रहने की क्षमता) घट जाता है.

कोरोनावायरस को डिसइंफेक्टेंट से खत्म किया जा सकता है. जहां अल्कोहल इसे एक मिनट में खत्म कर सकता है, वहीं ब्लीच इसे खत्म करने में 30 सेकंड लेता है. अभी यह साफ नहीं है कि किसी के किसी वस्तु पर मौजूद कोरोनावायरस इंसान के हाथ में पहुंचने में कितना समय लेता है, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि इससे बचने के लिए लोगों को लगातार अल्कोहल के हैंडवॉश से हाथ धोने चाहिए.

हवा से तैरकर लोगों को संक्रमित कर रहा

यह वायरस अब हवा में मौजूद सूक्ष्म बूंदों में मिलकर संचरण करने लगा है और हवा में तैरते हुए दूसरे व्यक्ति को संक्रमित कर रहा है जिसे एयरोसोल ट्रांसमिशन कहा जाता है. अब तक वायरस के डायरेक्ट ट्रांसमिशन और कॉन्टेक्ट ट्रांसमिशन की ही पुष्टि हुई थी. एयरोसोल ट्रांसमिशन का मतलब है कि वायरस हवा में मौजूद सूक्ष्म बूंदों से मिलकर एयरोसोल बना रहा है. इससे सांस लेने पर भी संक्रमण हो रहा है.

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