सियाचिन में माइनस 40 डिग्री तापमान में टूरिस्ट बिता सकेंगे सेना के साथ वक्त

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सेना प्रमुख बिपिन रावत ने हाल ही में कहा कि आम लोगों के लिए भी दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र सियाचिन के रास्ते खोले जा सकते हैं. इस जगह पर वहां के आस-पास के लोगों के जाने के लिए किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं है लेकिन अब बाकी लोगों के लिए भी ये रास्ते खुल सकते हैं. इस कदम के जरिए सेना का मकसद आम लोगों को सेना के जीवन से जोड़ना है और उन्हें बताना है कि किन परिस्थितयों में जवान हमारी रक्षा करते हैं.

कितनी दूर तक जा सकेंगे

सेना आम लोगों को ट्रेनिंग इंस्टीट्यूशन में आने दे रही है और अब विचार किया जा रहा है कि आम लोग सेना की पोस्ट तक भी आ सकें. अभी इस मामले में विचार किया जा रहा है कि कितनी दूरी तक लोगों को आने दिया जा सकता है. यहां कई नेता भी आ चुके हैं लेकिन उनके लिए भी एक सीमा निर्धारित की गई है.

लोगों में सेना और इसके ऑपरेशनल चैलेंज के बारे में जानने की बहुत उत्सुकता रहती है. इसलिए आम लोगों को सेना ने प्रशिक्षण केंद्रों और संस्थानों में जाने की इजाजत दी है. अब हम सियाचिन ग्लेशियर जैसी फॉरवर्ड लोकेशन को भी आम लोगों के लिए खोलना ऐसा ही एक कदम है.’

सियाचिन ग्लेशियर लद्दाख का हिस्सा है, जिसे अब केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अलग करके केंद्र शासित प्रदेश घोषित कर दिया है.

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