यहाँ लोगों ने टॉयलेट में बना रखा है किचन, जानिये क्या है वजह

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आपने ये तो कई बार सुना होगा कि ये दुनिया बहुत छोटी है. लेकिन क्या ये दुनिया इतनी छोटी हो गयी है कि आप रसोई के साथ टॉयलेट शेयर करने के बारे में सोच सकते हैं. शायद नहीं. लेकिन हांगकांग में आज यह नजारा हकीकत बन चुका है. जगह की कमी ने लोगों की जिंदगी दूभर कर दी है. यहां की रसोई में टॉयलेट चूल्हे के बीच शायद ही कोई फासला आपको नजर आये. हांगकांग के कई अपार्टमेंट में रसोई और टॉयलेट एक साथ ही बने हुए हैं.

जगह की कमी है वजह

75 लाख की आबादी वाले हांगकांग में अब जगह की कमी होने लगी है. यहां घरों की कीमतें आकाश छू रही हैं. प्रॉपर्टी के मामले में हांगकांग दुनिया का काफी महंगा शहर है. कई लोगों के पास इस तरह से रहने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं बचा है. और शायद, लोगों ने भी ऐसे रहना सीख भी लिया है. हांगकांग की जनगणना और सांख्यिकी विभाग की रिपोर्ट बताती है कि करीब दो लाख लोग ऐसे ही 88 हजार छोटे अपार्टमेंट में अपना जीवन गुजार रहे हैं.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक हांगकांग के प्रमुख इलाकों में साल 2007 से 2012 के बीच अपार्टमेंट की कीमत दोगुनी हो गई. इन अपार्टमेंट्स की हालत ऐसी है कि यहाँ लोगों को सांस लेने के लिए खुली हवा भी नहीं मिल पाती है.

कई घर तो केवल एक बेड के आकार के जितने ही हैं. यहां कम आय वालों के पास ऐसे रहने के अलावा कोई और विकल्प ही नहीं है. अब इन लोगों ने ऐसे रहना सीख लिया है. भले ही वे इस जगह खड़े होकर न तो अंगड़ाई ही ले पाते हो या न ही सुस्ता पाते हों. लेकिन यहां रहते-रहते इन लोगों की कॉकरोच और खटमल से दोस्ती जरूर हो जाती है.

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इन इलाकों में गरीब और अमीर के बीच की खाई बहुत गहरी है. इन फ्लैट्स को अकसर पिंजरे और ताबूत की संज्ञा दी जाती है. जो होटल, मॉल्स, टॉवर वाले चमचमाते हांगकांग का चौंकानेवाला चेहरा उजागर करता है.

रहने का यह तरीका लोगों की मानसिक स्थिति पर भी बुरा असर डालता है. हालांकि कई लोग सालों से ऐसे ही यहां गुजर-बसर कर रहे हैं. सरकारी प्रक्रिया के तहत घर मिलने में यहां औसतन पांच साल का समय लगता है. लेकिन यह इंतजार एक दशक तक बढ़ना बेहद ही आम है.

स्त्रोत: DW.Com


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