झारखंड की खगोल वैज्ञानिक ने खोजा क्षुद्रग्रह पर पानी

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किसी भी ग्रह पर जीवन होने का मूल प्रमाण पानी की उपलब्धता पर निर्भर करता है. इस रहस्य से पर्दा सोनारी की खगोल वैज्ञानिक मैत्रेई बोस ने उठाया है.

उन्होंने नासा के सहयोग से अंतरिक्ष के क्षुद्र ग्रह इटोकावा के कणों में पानी होने का पता लगाया है. अंतरिक्ष से लाए गए क्षुद्र ग्रह के कणों पर रिसर्च के दौरान उन्हें उसमें पानी की मौजूदगी का पता चला. अमेरिका की एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर मैत्रेई ने यह रिसर्च अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के दिशा-निर्देशन में किया. क्षुद्र ग्रह पर पानी की उपलब्धता को नासा के वैज्ञानिक अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण मान रहे हैं.

बाल से भी दस गुना छोटे कणों पर रिसर्च

मैत्रेई ने लैब में नैनो सिम्स इंस्ट्रूमेंट के जरिए मानव शरीर के बाल से भी दस गुना छोटे कणों पर रिसर्च कर पानी के अंश को निकाला. यह खोज अंतरिक्ष विज्ञान के लिए मील का पत्थर साबित होगी. इससे दूसरे ग्रहों में जीवन के रहस्यों से तो पर्दा उठेगा ही, पृथ्वी पर पानी कैसे आया इसके बारे में भी पता चल सकेगा.

ग्रहों के पार्टिकल पर पानी मिलना एक अद्भुत घटना है. इससे पहले यह केवल रिसर्च तक सीमित था. नए शोध से इसकी संभावना बढ़ गई है कि दूसरे ग्रह पर भी जीवन हो सकता है. हालांकि, यूएसए और जापान सिरिसरेक्स और हायाबुआ टू मिशन से क्षुद्र ग्रह के कुछ अवशेष अक्टूबर में आने पर और शोध किए जाएंगे. इसके बाद वहां पानी और अमोनिया एसिड की उपलब्धता पर शोध होगा. शोध में अगर दोनों तत्व पाए जाते हैं, तो वहां जीवन की संभावना साबित हो जाएगी.

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