पुण्यतिथि विशेष: दोबारा उपयोग में लाई जाने वाली मिसाइलों पर काम करना चाहते थे डॉ कलाम
भारत के अमूल्य रत्न और मिसाइलमैन एपीजे अब्दुल कलाम को आज उनकी पुण्यतिथि के मौके पर पूरा राष्ट्र कृतज्ञता के साथ श्रद्धांजलि दे रहा है। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की आज 4थी पुण्यतिथि मनाई जा रही है।
शिलांग में लेक्चर देते हुए हुआ निधन-
आज से चार साल पहले 27 जुलाई को उनका निधन मेघालय के शिलांग में हुआ था। यहां वे एक कॉलेज लेक्चर देने गए थे। मशहूर वैज्ञानिक अब्दुल कलाम आईआईएम शिलॉन्ग में लेक्चर दे रहे थे तभी उन्हें दिल का दौरा पड़ा, आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन अफसोस डॉक्टरों की टीम उन्हें बचा नहीं सकी। 83 वर्ष की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा था। उनकी सादगी से जुड़े किस्से भी लोग सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं।
एक टि्वटर यूजर ने कलाम साहब का एक वीडियो शेयर किया है जिसमें वह स्टेज पर रखी विशेष कुर्सी को हटवाकर सामान्य कुर्सियों पर बैठते दिख रहे हैं।
दोबारा
उपयोग में लाई जाने वाली मिसाइलों पर काम किया जाए
अपने निधन से महज महीने भर पहले पूर्व राष्ट्रपति एपीजे
अब्दुल कलाम ने मौजूदा डीआरडीओ प्रमुख सतीश रेड्डी को दोबारा उपयोग में लाई जा सकने वाली
मिसाइल प्रणाली पर काम करने के लिए कहा था। रेड्डी उस वक्त रक्षा मंत्री के
वैज्ञानिक सलाहकार थे।
रेड्डी ने कलाम से हुई मुलाकात को याद करते हुए बताया कि वैज्ञानिक सलाहकार बनने के बाद उन्होंने उनसे (कलाम से) उनके निधन से महज महीने भर पहले उनके आवास पर मुलाकात की थी। कलाम ने दोबारा उपयोग में लाई जा सकने वाली मिसाइलों का विचार दिया। एक ऐसी मिसाइल जो पेलोड ले जा सके, फिर वापस आ जाए और एक बार फिर दूसरा पेलोड ले जाए ”…इस तरह की प्रणाली पर काम करिये।
वर्ष 2012 में डीआरडीओ के तत्कालीन प्रमुख वी के सारस्वत ने दूरदर्शन को दिये एक साक्षात्कार में कहा था कि भारत दोबारा उपयोग में लाई जा सकने वाली मिसाइल प्रणाली विकसित करने की योजना बना रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने ‘फिर से उपयोग में लाये जा सकने वाले प्रक्षेपण यान प्रौद्योगिकी प्रदर्शक (आरएलवी-टीडी) का सफल परीक्षण किया है।
