मरने के बाद भी 4500 सालों से साथ है यह प्रेमी जोड़ा

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हरियाणा में हिसार ज़िले के राखीगढ़ी गांव में हड़प्पा सभ्यता से जुड़े एक क्षेत्र की खुदाई के दौरान लगभग 4500 साल पुराने ‘प्रेमी जोड़े’ का कंकाल मिले हैं. साल 2016 में भारत और दक्षिण कोरिया के वैज्ञानिकों को ये कंकाल मिले थे और बीते दो सालों में इस जोड़े की मौत के पीछे की वजहों को लेकर शोध किया जा रहा था. इस शोध को अब एक अंतरराष्ट्रीय पत्रिका में छापा जा चुका है.

खुदाई में मिले एक महिला और एक पुरुष के ये कंकाल एक-दूसरे की ओर देखते हुए प्रतीत होते हैं. ऐसा लगता है जैसे ये एक प्रेमी जोड़ा रहा होगा और दोनों की मौत एक ही जगह पर हुई. लेकिन इनकी मौत कैसे हुई ये अभी भी एक रहस्य है. ये कंकाल आधे मीटर रेतीली ज़मीन में दफ़न थे. वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि मौत के वक़्त पुरुष की उम्र करीब 35 साल रही होगी और महिला लगभग 25 साल की होगी. दोनों की लंबाई क्रमशः 5 फ़ीट 8 इंच और 5 फ़ीट 6 इंच रही होगी. इन कंकालों की हड्डियां बिलकुल साधारण हैं. ऐसा नहीं लगता कि इन दोनों को किसी तरह की कोई बीमारी थी. पुरातत्वविदों का मानना है कि ये जोड़ा 1200 एकड़ की एक बस्ती में रहता था जहां लगभग 10 हज़ार लोगों के घर थे. भारत और पाकिस्तान में लगभग दो हज़ार हड़प्पा साइट की खोज की गई है. राखीगढ़ी अब हड़प्पा सभ्यता के सबसे बड़े शहर मोहन जोदाड़ो से भी बड़ा है.  राखीगढ़ी में पुरातत्वविदों को एक क़ब्रिस्तान में लगभग 70 क़ब्रें मिली हैं. लेकिन इस ‘रहस्यमी जोड़े’ के कंकाल ने सबसे ज़्यादा सुर्खियां बटोरी हैं.

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पुरातत्वविदों का कहना है कि इस तरह की क़ब्र किसी खास परंपरा का हिस्सा तो नहीं थीं. हां ये संभव है कि इस जोड़े की मौत एक साथ हुई हो और इसलिए इन्हें साथ में एक ही क़ब्र में दफ़नाया गया होगा. राखीगढ़ी में मिली सभी चीज़ें बेहद आम हैं. ये वही चीज़े हैं जो अब तक हड़प्पा सभ्यता में मिलती आयी हैं. इस कंकाल के अलावा खुदाई में कुछ मिट्टी के बर्तन और कुछ गहने मिले हैं जो कांस्य युग के हैं. हड़प्पा युग के अंतिम संस्कारों को देखें तो पता चलता है कि ये लोग साधारण परंपराओं का पालन करते थे.

अगर मैसोपोटामिया सभ्यता की बात करें तो वहां राजाओं को मंहगे आभूषण, कलाकृतियों और बड़ी होर्डिंग के साथ दफ़नाया जाता था. ख़ास बात ये है कि मैसोपोटामिया की सभ्यता में कई ऐसे कंकाल मिले जिनमें हड़प्पा सभ्यता के आभूषण थे. ऐसा माना जाता है कि हड़प्पा सभ्यता के गहनों को उस वक़्त आयात किया जाता था.

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