बीटिंग द रिट्रीट की मधुर धुनों के साथ समाप्त हुआ गणतंत्र दिवस समारोह

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रिहर्सल परेड से लेकर बीटिंग द रिट्रीट तक चलने वाले गणतंत्र दिवस समारोह का चार दिवसीय कार्यक्रम आज समाप्त हो गया। हर साल 29 जनवरी को गणतंत्र दिवस के पर्व के आखिरी दिन के रूप में मनाया जाता है जिसे बीटिंग द रिट्रीट के नाम से जाना जाता है। इस मौके पर राष्ट्रपति भवन, साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक को रंगी बिरंगी रोशनी से सजाया गया।

यह कार्यक्रम में देश के राष्ट्रपित और प्रधानमंत्री समेत प्रमुख गणमान्य लोगों की मौजूदगी में आयोजित किया गया। इस मौके पर तीनों सेनाओं के बैंड अपनी विशेष धुनों के साथ मार्च करते हैं और आपसी तालमेल की मिसाल पेश करते हैं। बीटिंग द रिट्रीट सेना की बैरक में वापसी का प्रतीक है। राजतंत्र में यह कार्यक्रम सूर्यास्त के वक्त युद्ध विराम या समाप्ति के मौके पर आयोजित किया जाता था। इस कार्यक्रम में सेना के प्रमुख वाद्ययंत्र बजाए जाते हैं। बैंड टुकड़ी का नेतृत्व करने वाले ग्रुप कैप्टन राष्ट्रपति के पास जाकर सेना को वापस जाने की अनुमति मांगता है।

सारे जहां से अच्छा से हुआ समापन-
बीटिंग द रिट्रीट में सेना बैंड द्वारा कई प्रकार की धुने बजाई जाती हैं। इन धुनों में से प्रमुख धुन सारे जहां से अच्छा भी है। इस बार बीटिंग द रिट्रीट का कार्यक्रम इसी धुन के साथ समाप्त हुआ।

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