वॉलेट से छुटकारा चाहिए, इस तकनीक से हाथ घुमाते ही हो जाएगा पेमेंट

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तकनीक की दुनिया में हर रोज नए नए प्रयोग होते रहते हैं. ज्यादातर कोशिशें यही रहती है कि चुटकी बजाते हर काम हो जाए. हममें से कुछ लोगों को पर्स रखना भी जैसे कोई मुसीबत को साथ लेकर चलना लगता है. कभी कहीं गलती से छूट जाए तो मुसीबत, अगर किसी ने पर्स मार लिया तो उससे भी बड़ी मुसीबत. जाहिर है पर्स में केवल पैसे तो होते नहीं हैं. कई बार जरूरी कागज़, क्रेडिट कार्ड, गाडी की चाभी से लेकर ड्राइविंग लाइसेंस तक पर्स में मौजूद रहते हैं. ऐसे में एक ही पल में इंसान हर तरफ से लाचार महसूस करने लगता है. तकनीक से उससे छुटकारा दिलाने के लिए इन सारी चीजों को एक स्मार्टफोन में कैद कर दिया. पैसे के लिए ई-वॉलेट तो तरह तरह की चाभियों से छुटकारा पाने के लिए स्मार्ट लॉक्स जैसे ऑप्शन आ गए. ऊपर से स्मार्ट फोन पर्स से कहीं ज्यादा स्टाइलिश और लाने ले जाने में सुविधाजनक भी होता है. लेकिन इसके बाद भी समस्या जस की तस ही रही. ये फोन भी चोरी हो सकते हैं या कोई भी इन्हें आसानी से हैक कर आपकी निजी जानकारियाँ चुरा सकता है. अब इससे बचने के लिए क्या करें?

हाथ में छुपी तकनीक

स्वीडन में लोग ऐसी स्थिति से बचने के लिए अपने हाथों की सर्जरी करा कर उसमें माइक्रोचिप फिट करवा रहे हैं. यह माइक्रोचिप एक डिजिटल कीचेन की तरह काम करती है. एनएफसी, यानी नियर फील्ड कम्युनिकेशन एक ऐसा तरीका है जिससे आप वायरलेस तरीके से 4 सेंटीमीटर की दूरी तक मैसेज भेज सकते हैं. ऐसे में हाथों के अन्दर फिट की गयी इस छिप के माध्यम से लोग अपने जिम में साइन इन करने, कार और ऑफिस के दरवाजे को अनलॉक करने और क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करने जैसे काम कर पा रहे हैं. यह अभी शुरूआती दौर में है इसलिए उम्मीद की जा रहे है कि आने वाले समय में हाथ में फिट की जाने वाली इस माइक्रोचिप के जरिये लोग और भी ज्यादा काम सुविधाजनक तरीके से कर पायेंगे. हालांकि माइक्रोचिप्स को बॉडी में फिट करने का यह तरीका नया नहीं है. स्वीडन में इसका इस्तेमाल लोग 2015 से ही करते आ रहे हैं. ये चिप्स वैसे ही होते थे जैसा लोग अपने पालतू जानवरों को ट्रैक करने के लिए उनकी बॉडी में फिट किया करते थे. लेकिन ये चिप्स उनसे कही बेहतर हैं. बल्कि 2017 से ही लोगों ने इन चिप्स की मदद से ट्रेन की टिकट्स तक बुक करनी शुरू कर दी.

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फायदे के साथ नुकसान भी

ये चिप्स सिर्फ आपके काम को ही आसान नहीं बनाती हैं बल्कि आपका भी रिकॉर्ड रखती है. मसलन यह हर समय आपकी लोकेशन जरूरतमंद लोगों तक पहुंचती है. आप दिन में किस समय ब्रेकफास्ट या लंच करते हैं से लेकर कितना चलते हैं और यहाँ तक कि कितनी बार टॉयलेट यूज करते हैं इसका भी डाटा इसके पास मौजूद रहता है. ऐसे में कई बार अपना पुराना पर्स जरूर लोगों को याद आने लगेगा जिसे जरूरत ना होने पर आप घर छोड़ सकते थे लेकिन इन चिप्स से पीछा छुड़ाना बहुत मुश्किल है. साथ ही डाटा सिक्योरिटी भी एक समस्या हो सकती है. एनएफसी को भी स्पेश्लाइज्द रीडिंग और कोडिंग स्किल्स के साथ हैक करना संभव है. स्मार्टफोन्स में इस तरह की स्थिति से बचने के लिए बायोमीट्रिक रीडिंग यानी फिंगरप्रिंट जैसी चीजें इस्तेमाल की जाती हैं लेकिन माइक्रोचिप्स में ऐसा कुछ नहीं है.

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