भारत की पहली हाई स्पीड ट्रेन इस साल दौड़ने को तैयार

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भारत में हाई स्पीड ट्रेनों के ख्वाब देखने वाले लोगों का सपना अब सच होने जा रहा है।दिल्ली-वाराणसी के बीच ट्रेन-18 की रफ्तार 130 किलोमीटर प्रतिघंटा रहेगी। हालांकि सेमी हाई स्पीड के चलते यह ट्रेन 160-200 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ सकती है। 130 किलोमीटर रफ्तार के बावजूद इस रूट की सबसे तेज गति वाली मेल-एक्सप्रेस ट्रेन से टी-18 अपनी दूरी 45 फीसदी तेज चलेगी। वर्तमान में दिल्ली-वाराणसी की दूरी मेल-एक्सप्रेस टे्रन 11 से 12 घंटे में तय करती हैं जबकि टी-18 महज आठ घंटे में अपना सफर पूरा करेगी।

टी-18 का दिल्ली-इलाहाबाद के बीच ट्रॉयल 30 दिसंबर को हो चुका है। दिल्ली-वाराणसी के बीच यह पहली शताब्दी एक्सप्रेस की तर्ज पर चेयरकार वाली टी-18 होगी। यह ट्रेन कानपुर व इलाहाबाद में दो-दो मिनट के लिए ठहरेगी। फिलहाल इसका किराया तय नहीं किया गया है।

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क्या हैं खासियत-    

ट्रेन सेट-18 रफ्तार के साथ यात्री संरक्षा व सुविधा के मामले में विश्व स्तरीय है। यूरोपियन तकनीक वाली इस ट्रेन सेट के दरवाजे प्लेटफॉर्म पर रुकने के बाद ही ऑटोमैटिक रूप से खुलेंगे।

-कोच की सीढ़ियां ऑटोमैटिक (स्लाइडिंग स्टेप) आगे आकर प्लेटफॉर्म से सट जाएंगी। जिससे प्लेटफॉर्म व कोच के बीच का गैप पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा और यात्रियों के ट्रेन-प्लेटफॉर्म के बीच फंसने का खतरा नहीं होगा।

-ट्रेन सेट के कोच स्टेनलेस स्टील व यूरोपियन मानक के हैं।

-ट्रेन के आंतरिक व बाहरी डिजाइन यूरोपियन कंसल्टेंट ने तैयार किया है। ट्रेन सेट 18 शताब्दी एक्सप्रेस की तरह चेयरकार होगी। इसकी सीटें घुमावदार होंगी इससे जिस दिशा में ट्रेन चलेगी उसी दिशा में सीटें सेट की जा सकेंगी। कोच के भीतर प्लेन की तर्ज पर लंबी एलईडी लाइट ट्यूब लगी होंगी।

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-हाई स्पीड वाईफाई से मोबाइल, लैपटॉप, आईपॉड में रेलवे एप डाउनलोड कर सकेंगे। एप में देशी-विदेशी फिल्में, गाने, धारावाहिक व मनोरंजन के अलावा रेलवे जानकारी, टिकट बुकिंग, टैक्सी बुकिंग, होटल बुकिंग आदि की सुविधा होगी।

-प्रत्येक कोच में अपना खुद का इंजन होगा और पृथक ब्रेकिंग सिस्टम होगा। इससे शताब्दी की अपेक्षाकृत ट्रेन सेट को तेजी से रोका और चलाया जा सकेगा।

-टी-18 की सबसे बड़ी विशेषता उसकी सीट 360 डिग्री तक घूम जाती हैं।

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