अब मंगल ग्रह पर उड़ान भरेगा हेलीकॉप्टर

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नासा अभी तक कई रोवर मिशन मंगल ग्रह पर भेज चुका है. क्युरियोसिटी और ऑपरच्युनिटी जैसे मिशन से रिसर्च में काफी मदद मिली है और नयी-नयी जानकारियां मिली हैं. अब नासा एक नया मिशन भेज रहा है. इसमें मंगल ग्रह पर खोज और रिसर्च के लिए रोटरक्राफ्ट या हेलीकॉप्टर का प्रयोग किया जायेगा. यह पहली बार है जब नासा पृथ्वी से बाहर किसी ग्रह पर हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल करेगा. इस मिशन का नाम मार्स 2020 रोवर मिशन रखा गया है. यह मिशन जुलाई, 2020 में लॉन्च होगा.

मात्र 1.8 किलो ही है वजन

इस मिशन पर अगस्त 2013 में काम शुरू किया गया. इस उड़ने वाले रोवर का वजन मात्र 1.8 किलो है. इसका आकार एक सॉफ्ट बॉल जितना ही है. इसमें ट्विन रोटर लगे हैं. इसकी स्पीड 3000 आरपीएम है, जो धरती पर हेलीकॉप्टर के रोटर की दर से करीब 10 गुना अधिक है. यानी इस रोटर को उड़ने के लिए पृथ्वी की तुलना में 10 वां हिस्सा ही मेहनत करना पड़ता है. इस हेलीकॉप्टर में मंगल ग्रह पर ऑपरेशन करने की सभी तरह की सुविधाएं मौजूद हैं. इसमें सोलर सेल और लीथियम आयन बैट्री का प्रयोग हुआ है. इसमें हीटिंग मैकेनिज्म का भी प्रयोग किया गया है ताकि मंगल ग्रह पर रात के समय इसे अत्यध्रिक ठंडा होने से बचाया जा सके.

रियल टाइम में नहीं हो सकता है कंट्रोल

एक बार जब रोवर मंगल ग्रह की सतह पर उतर जायेगा तो सबसे पहले यह एक उचित स्थान तक पहुंचेगा जहां से हेलीकॉप्टर को नीचे उतारेगा और उसके बाद उससे उचित दूरी बना ताकि हेलीकॉप्टर के उड़ते समय उसे कोई नुकसान न पहुंचे. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इसे रियल टाइम में कंट्रोल नहीं किया जा सकेगा. असल में पृथ्वी से मंगल ग्रह की दूरी इतनी अधिक है कि यहां से कमांड भेजने पर वहां तक पहुंचने में ही कई मिनट लग जाते हैं. इसलिए यह एक बार में छोटी-छोटी उड़ान ही भर सकेगा. हालांकि यदि यह प्रोजेक्ट सफल होता है, तो आनेवाले समय में मंगल ग्रह की उन जगहों तक भी पहुंचना संभव हो सकेगा, जहां तक जमीन पर चलनेवाले रोवर नहीं पहुंच सकते हैं.

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