रूस के ठंडे इलाके में कोरोना कर रहा खुद में बदलाव, क्या प्रभाव पड़ेगा वैक्सीन के निर्माण में

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रशिया में एक कंज्यूमर हेल्थ वाचडॉग ने दावा किया है कि साइबेरिया में कोरोना वायरस में म्यूटेशन सामने आ रहा है. यानी कोरोना वायरस साइबेरिया के ठंडे इलाके में खुद को बदल कर अपना एक अलग ही रूप विकसित करने में लगा हुआ है. हालांकि यह परिवर्तन कैसा है और इसका आगे चलकर कैसा प्रभाव रहेगा इस बारे में वैज्ञानिकों ने कुछ भी खुलासा अभी नहीं किया है. लेकिन माना जा रहा है कि वायरस में होने वाला यह बादलाव ज्यादा खतरनाक नहीं होगा और इससे कोरोना वायरस की वैक्सीन की उपयोगिता पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा.

कैसे लाता है खुद में बदलाव

कोरोना वायरस का नया ‘स्ट्रेन’ (डी614जी) यूरोप में उभरा और दुनियाभर में फैल गया. ‘साइंस’ पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में पता चला कि ‘डी614जी’ तेजी से अपनी नकल बनाता है और सामान्य वायरस से ज्यादा तेजी से फैल भी सकता है.

शोधकर्ताओं के मुताबिक, ‘डी614जी’ स्ट्रेन का जानवरों की किसी ज्यादा गंभीर बीमारी से कोई वास्ता नहीं है और यह एंटीबॉडी पैदा करने वाली दवाओं के प्रति थोड़ा ज्यादा संवेदनशील है. बताया जाता है कि इस स्ट्रेन का उद्भव कोरोना महामारी की शुरुआत में चीन में हुआ था.

कुछ महीने पहले जारी हुई एक रिपोर्ट के मुताबिक, ‘डी614जी’ स्ट्रेन अन्य व्यक्तियों में 10 गुना अधिक तेजी से संक्रमित करने की क्षमता रखता है. विशेषज्ञों का कहना था कि कोरोना वायरस से बचने के लिए किए जा रहे उपायों की वजह से ही यह नियंत्रण में है, लेकिन एक बार अगर इस वायरस का प्रसार विस्फोटक रूप में फैल गया तो इसे नियंत्रित करना बहुत मुश्किल हो सकता है.

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हालांकि भारत समेत दुनियाभर में कोरोना से निपटने के लिए वैक्सीन बनाने का काम काफी तेजी से चल रहा है. लेकिन सबसे अच्छी बात ये है कि बिना वैक्सीन भारत में इस बीमारी से स्वस्थ होने की दर करीब 93 फीसदी हो गई है.

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