राजस्थान में केवल 150 गोंडावन चिड़िया ही बची, कुछ ऐसे हो रही है इसे बचाने की कोशिश

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राजस्थान के जैसलमेर में स्थित ब्रीडिंग सेंटर में कृत्रिम हैचिंग से गंभीर रूप से संकट ग्रस्त पक्षी ग्रेट इन्डियन बस्टर्ड का बच्चा पैदा किया गया है. कृत्रिम हैचिंग वह प्रक्रिया होती है जिसमें चिड़िया खुद अंडे नहीं सेती बल्कि यह काम मशीनों के द्वारा किया जाता है. ग्रेट इन्डियन बस्टर्ड राजस्थान का राज्य पक्षी है. जिसकी संख्या लगातार घटती जा रही है. इसे वहां के आम बोलचाल की भाषा में गोंडावन पक्षी के नाम से भी जाना जाता है.

राजस्थान में गोंडावन पक्षी की संख्या 1980 में केवल 1000 ही बची थी. लेकिन तब भी इस दुर्लभ पक्षी के संरक्षण में कोई ख़ास कदम नहीं उठाये गए. जिसका परिणाम यह हुआ कि 2018 तक इनकी संख्या घटकर केवल 140 हो गयी. हर साल बड़ी संख्या में गोंडावन चिड़िया बिजली की तार के संपर्क में आने और अन्य बिजली परियोजनाओं के संपर्क में आकर अपनी जान्गंवा रही हैं.  संख्या में तेजी से गिरावट का एक कारण यह भी है कि यह पक्षी साल में केवल एक ही बार अंडे देती है. ऐसे में कृत्रिम हैचिंग द्वारा गोंडावन पक्षी के बच्चे पैदा करने से उनकी संख्या को बढाने में काफी मदद मिलेगी. अब इसी तरीके से एक और बच्चा पैदा करने के लिए संस्थान ने केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय से अनुमति माँगी है. राजस्थान में इस पक्षी की संख्या अभी मात्र 150 के लगभग रह गयी है.

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