बच्चों की पॉटी में हैं पेट के रोगों का इलाज

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वैज्ञानिकों का दावा है कि इंसान के नवजात के मल में भी सेहत के लिए बेहत अच्छे माने जाने वाले बैक्टीरिया बेशुमार मात्रा में पाए जाते हैं.
नवजात का मल दरअसल एक किस्म का “सुपरफूड” है. उसमें लैक्टिक एसिड वाले बैक्टीरिया बड़ी मात्रा में होते हैं. ये बैक्टीरिया व्यस्क इंसान की आंतों के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं. उम्र बढ़ने के साथ साथ एंटीबायोटिक दवाओं या दूसरे किस्म की कई दवाओं से इंसान की आंत में मौजूद बैक्टीरिया कम होने लगते हैं. इसका असर मेटाबॉलिज्म पर पड़ता है और पेट में बीमारियां जन्म लेने लगती हैं. शोध के मुताबिक नवजातों के मल में मौजूद बैक्टीरिया वयस्क की आंतों में पहुंचकर शॉर्ट चेन फैटी एसिड बनाते हैं. मोटापे के साथ डायबिटीज, ऑटोइम्यून बीमारियों और कैंसर के मरीजों की आंतों में आम तौर पर शॉर्ट चेन फैटी एसिड बहुत कम होते हैं.

नवजात के मल की खासियत

शिशु आम तौर पर व्यस्क इंसान की तुलना में ज्यादा स्वस्थ होते हैं. उनमें उम्र संबंधी बीमारियां नहीं के बराबर होती हैं. प्रयोग के दौरान 34 बच्चों के डायपर रोज जमा किए गए. डायपरों से जुटाए गए मल को वयस्क चूहों को खिलाया गया. सेहतमंद बैक्टीरिया से भरे इस मल की खुराक लेते ही चूहे ज्यादा सेहतमंद हो गए. इस डाटा का इस्तेमाल भविष्य में ह्यूमन माइक्रोबायोम, मेटाबॉलिज्म से जुड़ी बीमारियों पर प्रोबायोकटिक्स के असर को जानने के लिए किया जा सकता है. कुछ ऐसा ही प्रयोग जर्मनी के माक्स प्लांक इंस्टीट्यूट फॉर बायोलॉजी ऑफ एजिंग में भी किया गया. यहां वैज्ञानिकों ने वयस्क मछलियों को नवजात मछलियों का मल खिलाया. प्रयोग के बाद देखा गया कि नवजात मछलियों का मल खाने वाली मछलियों की आंतें बहुत स्वस्थ हो गईं.

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