भारतीय इंजीनियर धूएं से बना रहे हैं स्याही

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डीजल इंजन से निकलने वाला काला धुआं हवा को और ज्यादा दूषित करता है. लेकिन अब भारतीय इंजीनियरों की एक टीम ने इस काले धुएं को स्याही में बदलने की तरकीब खोजी है. डिवाइस, डीजल जेनरेटर के एक्जॉस्ट पाइप से निकलने वाले धुएं में मौजूद 90 फीसदी सूक्ष्म कणों को खींच लेती है. फिर इन हानिकारक कणों से स्याही बनाई जाती है. तीन इंजीनियरों ने चक्र इनोवेशन नाम की कंपनी भी बनाई है. कंपनी अब तक 53 सरकारी दफ्तरों और कॉलोनियों में यह डिवाइस लगा चुकी है. धूपर के मुताबिक 53 डिवाइसों की मदद से 1,500 अरब लीटर हवा स्वच्छ रह सकेगी.

20 हजार लीटर से ज्यादा स्याही बनायी

डिवाइसों की मदद से अब तक 500 किलोग्राम से ज्यादा कालिख जमा की गई है. इस कालिख से 20,000 लीटर से ज्यादा स्याही बनायी गयी है. भारत का आईटी हब कहे जाने वाले शहर बेंगलुरू में भी ग्रैविकी लैब्स नाम की कंपनी ने ऐसी ही डिवाइस बनाई है. ग्रैविकी लैब्स की डिवाइस डीजल गाड़ियों से निकलने वाले धुएं से स्याही बना रही है.

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