भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम की जंयती आज

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ऐसा कहा जाता है कलयुग में भी ऐसे 8 चिरंजीव देवता और महापुरुष हैं जो जीवित हैं। इन्हीं 8 महापुरुषों में एक भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम हैं, जिनकी जंयती अक्षय तृतीया के दिन मनाई जाती है। कहा जाता है कि भगवान शिव के परमभक्त परशुराम न्याय के देवता हैं. अपने माता-पिता के अपमान का बदला लेने के लिए उन्होंने 21 बार इस धरती को क्षत्रिय विहीन कर दिया था। ऐसा इसलिए क्योंकि हैहय वंश के राजा सहस्त्रार्जुन ने अपने बल और घमंड की वजह से ब्राह्राणों और ऋषियों पर अत्याचार करते जा रहा था। इतना ही नहीं इन्होंने क्रोध में भगवान गणेश को भी नहीं बख्शा था।

इस वजह से किया सहस्त्रार्जुन का वध-
एक बार सहस्त्रार्जुन अपनी पूरी सेना समेत भगवान परशुराम के पिता जमदग्नि मुनी के आश्रम पहुंच गया। मुनि ने कामधेनु गाय के दूध से पूरी सेना का आदर से स्वागत किया लेकिन चमत्कारी कामधेनु को उसने अपने बल का प्रयोग कर बलपूर्वक छीन लिया। उसके बाद जब यह बात परशुराम को पता चली तो उन्होंने सहस्त्रार्जुन को मार डाला। उसके बाद सहस्त्रार्जुन के पुत्रों ने बदला लेने के लिए परशुराम के पिता का वध कर दिया. उनकी माता पति के वियोग में चिता पर सती हो गईं। इसके बाद पिता के शरीर पर 21 घाव को देखते हुए परशुराम ने शपथ ली थी कि वह इस धरती से समस्त क्षत्रिय वंशों का संहार कर देंगे। इसके बाद पूरे 21 बार उन्होंने पृथ्वी से क्षत्रियों का विनाश कर अपनी प्रतिज्ञा पूरी की।

तोड़ दिए थे भगवान गणेश के दांत –
एक बार परशुराम भगवान शिव के दर्शन करने के लिए कैलाश पर्वत पहुंचे लेकिन भगवान गणेश ने उन्हें मिलने देने से इनकार कर दिया। इस बात पर परशुराम को क्रोध आ गया और उन्होंने अपने फरसे से भगवान गणेश का एक दांत तोड़ दिया। इस वजह से भगवान गणेश एकदंत भी कहा जाता है।

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