यहाँ जानें श्रीदेवी की अचानक मौत की वजह

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अब तक मिली जानकारी के मुताबिक वो दुबई में एक शादी में शिरकत कर रही थीं और वहीं उन्हें भीषण कार्डियक अरेस्ट हुआ. ऐसे में कई लोगों के मन में ऐसे सवाल भी उठ रहे होंगे कि आखिर ऐसा क्या हो गया कि इतनी कम उम्र में अच्छी भली स्वस्थ श्रीदेवी अचानक सबको ऐसे ही छोड़कर चली गयी. दुबली-पतली श्रीदेवी को देखकर ये कहना काफ़ी मुश्किल है कि फ़िटनेस को लेकर सजग रहने वाली सेलिब्रिटी अचानक एक दिन ऐसी बीमारी के कारण बहुत दूर चली जाएंगी.

क्या होता है कार्डिएक अरेस्ट?

लेकिन कार्डिएक अरेस्ट होता क्या है, ये इंसानी शरीर के लिए इतना ख़तरनाक क्यों साबित होता है और ये हार्ट फ़ेल होने या दिल का दौरा पड़ने से कैसे अलग है? हार्ट.ओआरजी के मुताबिक कार्डिएक अरेस्ट अचानक होता है और शरीर की तरफ़ से कोई चेतावनी भी नहीं मिलती. इसकी वजह आम तौर पर दिल में होने वाली इलेक्ट्रिकल गड़बड़ी है, जो धड़कन का तालमेल बिगाड़ देती है. इससे दिल की पम्प करने की क्षमता पर असर होता है और वो दिमाग़, दिल या शरीर के दूसरे हिस्सों तक ख़ून पहुंचाने में कामयाब नहीं रहता. इसमें चंद पलों के भीतर इंसान बेहोश हो जाता है और नब्ज़ भी जाती रहती है. अगर सही वक़्त पर सही इलाज न मिले तो कार्डिएक अरेस्ट के कुछ सेकेंड या मिनटों में मौत हो सकती है.

तो क्या कार्डिएक अरेस्ट में मौत तय है?
दरअसल, कार्डिएक अरेस्ट हर मौत का अंतिम बिंदु कहा जा सकता है. इसका मतलब है दिल की धड़कन बंद हो जाना और यही मौत का कारण है. इसके कारण अलग-अलग हो सकते हैं. आम तौर पर इसकी वजह दिल का बड़ा दौरा पड़ना हो सकता है. हालांकि 54 साल की उम्र में आम तौर पर जानलेवा दिल का दौरा पड़ने का ख़तरा कम रहता है. श्रीदेवी को दूसरी मेडिकल दिक्कतें पहले से भी रही हो सकती हैं, लेकिन ज़ाहिर है इसके बारे में हम लोग नहीं जानते. दिल में इलेक्ट्रिकल सिग्नल की दिक्कतें शरीर में जब रक्त नहीं पहुंचाती तो वो कार्डिएक अरेस्ट की शक्ल ले लेता है. जब इंसान का शरीर रक्त को पम्प करना बंद कर देता है तो दिमाग़ में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है. ऐसा होने पर इंसान बेहोश हो जाता है और सांस आना बंद होने लगता है.

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कैसे जानेंगे कि दिल का दौरा पड़नेवाला है? क्या कोई लक्षण दिखते हैं?
सबसे बड़ी मुश्किल ये है कि कार्डिएक अरेस्ट आने से पहले इसके कोई लक्षण नहीं दिखते. यही वजह है कि कार्डिएक अरेस्ट की सूरत में मौत होने का ख़तरा कई गुना बढ़ जाता है. इसकी सबसे आम वजह असाधारण हार्ट रिदम बताई जाती है जिसे विज्ञान की भाषा में वेंट्रिकुलर फ़िब्रिलेशन कहा जाता है. दिल की इलेक्ट्रिकल गतिविधियां इतनी ज़्यादा बिगड़ जाती हैं कि वो धड़कना बंद कर देता है और एक तरह से कांपने लगता है. कार्डिएक अरेस्ट की कई वजहें हो सकती हैं, लेकिन दिल से जुड़ी कुछ बीमारियां इसकी आशंका बढ़ा देती हैं.

क्या कार्डिएक अरेस्ट से रिकवर किया जा सकता है?

कई बार छाती के ज़रिए इलेक्ट्रिक शॉक देने से इससे रिकवर किया जा सकता है. इसके लिए डिफ़िब्रिलेटर नामक टूल इस्तेमाल होता है. ये आम तौर पर सभी बड़े अस्पतालों में पाया जाता है. इसमें मुख्य मशीन और शॉक देने के बेस होते हैं, जिन्हें छाती से लगाकर अरेस्ट से बचाने की कोशिश होती है. लेकिन अगर कार्डिएक अरेस्ट आने की सूरत में आसपास डिफ़िब्रिलेटर न हो तो क्या किया जाए? जवाब है, CPR. इसका मतबल है कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन. इसमें दोनों हाथों को सीधा रखते हुए मरीज़ की छाती पर ज़ोर से दबाव दिया जाता है. इसमें मुंह के ज़रिए हवा भी पहुंचाई जाती है.

दुबई में डॉक्टरों ने इस बात का पता लगाया होगा या लगा रहे होंगे कि श्रीदेवी को कार्डिएक अरेस्ट क्यों हुआ. शायद उन्हें अब तक इसकी वजह पता भी चल गई हो.

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