तुमसे जिन्दगी कलरदार हुई है

Spread the love

शैलेन्द्र “उज्जैनी” [email protected]

जब से तुम से आँखे चार हुई है,
ज़िदगी तब से गुलज़ार हुई है।
तुझ से मिलकर जीना सीखा है,
बिन तेरे जिन्दगी बेकार हुई है।
तेरे होंठो की लाली से रंगत है दुनिया की,
सूनी थी राहें मेरी,
तुझसे मिलकर कलरदार हुई है।
दिल का मकाँ था खाली-खाली,
अब चहल-पहल है,
जब से वो किराएदार हुई है।
उसकी काली जुल्फें जैसे काली घटाएं हैं,
और चँदा से चेहरे से बरसती चांदनी में,
जिन्दगी चमकदार हुई है।
प्रेम दिवस पर एक गुलाब से क्या होगा,
“उज्जैनी” की जिन्दगी तो तुमसे ही
फूलों का बाज़ार हुई है।

              ******

ब्रह्म मुहूर्त में जागते थे श्रीराम, जानें फायदे ( Brahma muhurta ke Fayde) , देखें यह वीडियो


हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें।

Spread the love
READ  ना करना मुझे खुद से दूर...मां!
Do NOT follow this link or you will be banned from the site! © Word To Word 2021 | Powered by Janta Web Solutions ®
%d bloggers like this: