कलयुगी रिश्तों की चीखें

Spread the love

Bhawna kumari [email protected]

रोज कहीं एक दामिनी फंस रही है
संबंधों के जाल में
कहीं कोई पिता तो कहीं कोई भाई ही छुपा बैठा है
भेड़िये के भेष में
कहीं कोई रावण छुपा बैठा है
साधु के भेष में
कहीं कोई तुलसी छला रही
भक्तों के ही जाल में
आज हर इंसान ही घूम रहा है
चेहरे पर चेहरा लगाए
सतयुग हो या कलयुग
कभी कोई दामिनी न बच सकी
अपनों के ही वार से
इस पत्थर दिल संसार से…

               *****

ब्रह्म मुहूर्त में जागते थे श्रीराम, जानें फायदे ( Brahma muhurta ke Fayde) , देखें यह वीडियो


हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें।

Spread the love
READ  कभी ख़्वाबों में दाद भी दे जाया करो
© Word To Word 2021 | Powered by Janta Web Solutions ®
%d bloggers like this: