तो आपके अन्दर ही छुपे बैठे हैं भूत प्रेत

Spread the love

आप घर में अकेले हैं…अचानक से लाईट चली जाती है और फिर कहीं से कुछ खटर पटर की आवाज…! मन में डर गहराने लगता है. हाथ पैर कांपने लगते हैं. लेकिन यह डर आता कहाँ से है?

डर… इसका सामना हर इंसान करता है. क्या वाकई कोई चीज हमें डराना चाहती है या फिर मस्तिष्क भ्रम पैदा कर हमें असुरक्षित महसूस कराता है. असाधारण घटनाओं का वैज्ञानिक अध्ययन करने वाली पैरासाइकोलॉजी, इसी डर का जवाब खोजने की कोशिश कर रही है. पैरासाइकोलॉजिस्ट मुख्य रूप से तीन प्रकार की रिसर्च में शामिल होते हैं. पहला है, विचित्र किस्म के होने वाले आभास जिसमें टेलिपैथी, पहले से आभास होना या परोक्षदर्शन जैसी चीजें शामिल हैं. दूसरा है, मस्तिष्क के जरिये कोई काम करना, जैसे बिना छुए चम्मच को मोड़ देना. तीसरा है, मृत्यु के बाद का संवाद, जैसे भूत प्रेत या आत्माओं से बातचीत करना.

इन असाधारण घटनाओं से जुड़े मनोविज्ञान को समझने के लिए न्यूरोसाइंस की भी मदद ली जाती है. असामान्य परिरस्थितियों में कई बार हमारी आंखें अलग ढंग से व्यवहार करती हैं. कम रोशनी में आंखों की रेटीनल रॉड कोशिकाएं सक्रिय हो जाती हैं और हल्का मुड़ा हुआ सा नजारा दिखाती हैं. आंख की पुतली को बेहद कोने में पहुंचाकर अगर हम आखिरी छोर से कोई मूवमेंट देखें तो वह बहुत साफ नहीं दिखता है. डिटेल भी नजर नहीं आती है. सिर्फ काला और सफेद ही दिखता है. इसका मतलब साफ है कि रॉड कोशिकाएं रंग नहीं देख पा रही हैं. ऐसी परिस्थितियों में हमारा मस्तिष्क सूचना के अभाव को भरने और तार्किक जानकारी में बदलने की कोशिश करता है. हमें ऐसा लगने लगता है जैसे हमने कुछ विचित्र देखा है या यूं कह लें की भूत देखा है.

READ  सूर्य के प्रकाश के बिना चमकता है यह चंद्रमा, जानिए कैसा है यहां का वातावरण

ऐसे भले ही कुछ पलों के लिए होता हो, लेकिन इसके बाद इंसान के भीतर हलचल शुरू हो जाती है. सांस तेज चलने लगती है, धड़कन बढ़ जाती है, शरीर बेहद चौकन्ना हो जाता है. जिस तरह हर व्यक्ति में भावनाओं का स्तर अलग अलग होता है, वैसा ही डर के मामले में भी होता है. कुछ को बहुत ज्यादा दर लगता है तो कुछ को बिलकुल भी नहीं. डरावने माहौल में कुछ लोगों के मस्तिष्क में डोपोमीन का रिसाव भी होने लगता है, इसके चलते उन्हें मजा आने लगता है, जबकि बाकी लोग बुरी तरह डर रहे होते हैं. अक्सर भूतिया कहानियां सुनने वालों या हॉरर फिल्में देखने वाले लोगों के जेहन में ऐसी यादें बस जाती हैं, और जब भी कोई असाधारण वाकया होता है, तो ये स्मृतियां कूदने लगती हैं.

जब हम कोई पुरानी जर्जर इमारत देखते हैं, जहां अंधेरा हो, आस पास कोई आबादी न हो, तो हमें भय का अहसास होने लगता है. ज्यादातर हॉरर फिल्मों में ऐसी इमारतों को भूतिया बिल्डिंग के रूप में पेश किया जाता है. और यही बात हमारे मस्तिष्क में बैठ चुकी है. ऐसी इमारत देखते ही हमारा मस्तिष्क हॉरर फिल्मों की स्मृति सामने रख देता है. डर पैदा कर मस्तिष्क ये चेतावनी देता है कि इस जगह खतरा है, जान बचाने के लिए यहां से दूर जाना चाहिए. इसके बाद धड़कन तेज हो जाती है और पूरा बदन तेजी से भागने या किसी संकट का सामना करने के लिए तैयार हो जाता है.

आप किसी शख्स से इतना भर कह दीजिए कि यह इमारत भूतिया है तो उसके भीतर एक अजीब सी भावना फैलने लगेगी. इसके बाद उस इमारत में जो कुछ भी सामान्य ढंग से घटेगा, वो भी उसे असामान्य ही लगेगा. लेकिन क्या भूत होते हैं? इसके जबाव में वैज्ञानिक कहते हैं, “कल्पना और भूतों पर विश्वास या विचित्र परिस्थितियां, इनके संयोग से ऐसा आभास होता है कि जैसे हमारे अलावा भी कोई और है, जबकि असल में कोई और होता ही नहीं है.” लेकिन किसी चीज को बिना छुए उसमें हलचल कर देना या फिर पूर्वाभास व टेलिपैथी जैसे वाकये अब भी विज्ञान जगत को हैरान कर रहे हैं. मस्तिष्क की कुछ विलक्षण शक्तियां अब भी विज्ञान के दायरे से कोसों दूर हैं.

ब्रह्म मुहूर्त में जागते थे श्रीराम, जानें फायदे ( Brahma muhurta ke Fayde) , देखें यह वीडियो


हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें।

Spread the love
© Word To Word 2021 | Powered by Janta Web Solutions ®
%d bloggers like this: